पर्दा गिरा दो (लघु नाटक)
नाटककार- रवि कुमार गुप्ता
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पात्र
01- लड़की एंकर
02- पहला लड़का (जिंस में)
03- दुसरा लड़का (जिंस कुर्ता में)
04- तीसरा लड़का (पैंट-शर्ट में)
05- लड़की (जिंस टी-शर्ट में)
06- लड़की (साड़ी में)
07- लड़की (सलवार में)
08- शिक्षिका (40साल की)
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(नाट्य मंच का दृश्य,एक लड़की एंकर के मद-मस्त अदा में)- दोस्तों यह यू-ट्यूब नहीं है जो कि बाद में ऑफलाइन सेव कर के देख लेंगे और ना ही फेसबुक है कि बाद में टाइमलाइन पर जाकर कमेंट मार देंगे. ये मंच है जहां पर सबकुछ लाइव मिलेगी कहानी भी और कलाकार भी, बॉलीवुड का नहीं अपन पूरा कोरापुटीया कलाकार, क्या... तो अर्ज किया है-
‘मखमली नहीं था
फिर भी दुपट्टा लूट लिया,
नाखून तो बहुत बढ़ाए
पर काम ना आए दामन के’
ये तो बस शायरी अभी, कहानी आगे है दोस्त... (बोलकर हाथों से इशारा करता है तबतक तीन दोस्त मोबाइल पर देखते हुए बातचीत करते हुए मंच पर आते हैं)
पहला लड़का- भाई, ई देख मेरे फेसबुक पर बिपाशा का मस्त वाला फोटू
दुसरा लड़का (चुस्की लेकर बोला)- क्या फोटू-फोटू लगा रखा है, सन्नी को लाइव देखो, बिपाशा का जमाना गया...
तीसरा लड़का- लड़कियों का जमाना नहीं जाता यारों, आज भी सुष्मिता जब स्कर्ट में आती है तो बिपाशा, राधिका, सन्नी सब बिना हल्दी वाली दाल लगती हैं.
(चारोएक साथ हामी भरते हैं पर मोबाइल से नजर नहीं हटती)
चौथा लड़का- भाई जब सामने से लड़की सलवार में भी जाए तो नजर मोबाइल के सुष्मिता से भी हट जाती है..... का समझे...
(तीन लड़के सामने से आ रही लड़कियों को घूरने लगते हैं, उनको इशारा कर बात करते हैं, ओ तेरी साड़ी-सलवार में धांसू दिख रही है, हां रे...)
(तीन कॉलेज लड़कियां मंच पर, साड़ी, सलवार और जिंस-टी शर्ट में आती हैं और बात कर रही हैं)
पहली साड़ी वाली लड़की- वाव, तेरा जिंस-टी शर्ट मस्त है.
जिंस-टी शर्ट वाली लड़की- तेरी साड़ी क्या कम है. और इसको देखो सलवार में तो सलीम की अनारकली बन गई है.
साड़ी वाली लड़की- हमारी ओर भी नजर फेरो मोहतरमा.
एक लड़का (तपाक से )- हमारी नजर है ना आप सबो पर, सर से लेकर पांव तक.
जिंस वाली(तम-तमाकर)- होश में रहकर बात करो, जानते नहीं हो मुझे.
दुसरा लड़का- जानते हैं ना मैडम, आप डीएवी कॉलेज के लेकचरर की बेटी हैं और आप ऊ सब कपड़ा जो खरीदती हैं ना उस दुकानदार को भी जानता हूं.
साड़ी वाली लड़की- छोड़ो ना इन सबके मुंह मत लगो.
तीसरा लड़का- तो गले लग जाओ. (ठहाका मार कर हंसते हैं)
साड़ी वाली लड़की (दोनों सहेली का हाथ खिंचती है)- चलो यहां से....
एक लड़का- मैडम, साड़ी में तो और भी काटू लगती हो आप.
तभी इक 40 साल की औरत (टीचर)- मैं बहुत देर से देख रही हूं तुम लड़कियों को जाती क्यों नहीं हो लड़को के मुंह लगती हो.
जिंस वाली लड़की- पहले ये लोग मुंह लगे, पता नहीं इनकी नजर कहां-कहां जाती है और क्या-क्या बकते हैं. इनको कुछ नहीं बोलती आप.
40साल की टीचर- लड़का और बछड़ा बांधकर नहीं रखा जाता है.
जिंसवाली लड़की- पर समय पर लगाम तो घोडे को भी लगाया जाता है, मैम.
40साल की टीचर- लगाम लग जाएगी पर तुम चारा डालने वाला जिंस-स्कर्ट सब पहनना छोड़ दो.
साड़ी वाली लड़की- मैनें तो जिंस नहीं पहना फिर भी इनको काटू लगती हूं, सलवार में धांसू लगती हूं तो फिर क्या पहनूं चाचीजी बताओ.
जिंस वाली लड़की- इनकी जिंस-स्कर्ट-साड़ी से नहीं बल्कि नजरदोष है. सरकार को नसबंदी नहीं अब नजरबंदी ऑपरेशन चलाना चाहिए.
साड़ी वाली लड़की- सरकार की छोड़ मैं तो देख इसलिए ये लाल दुपट्टा मलमल का बैग में रखी हूं.
बाकि दो लड़की- मैं भी लिए आई हूं. (बैग से निकालकर देती हैं)
साड़ी वाली लड़की (तीनो दुपट्टा लेकर, मंच पर तानकर दर्शकों को दिखाकर)- ये लो जी हमारे समाज के मर्दाना-मर्द, आंखों पर बांधकर नजरबंदी कर लो. दुपट्टा लाज बचाने के लिए ही तो बना है तो ओढ लो ताकि हमारी नजर में तो बाकि मर्दों की मर्यादा बनी रहेगी.
(दुपट्टा लहरा कर उनसब पर ओढ़ा कर चल देती हैं, मस्ती में)
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